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Showing posts from November, 2022

घाघ भड्डरी लोक ज्योतिष परम्परा और विशेष ज्योतिषी वंश (Gagh Bhaddari lok jyotish parampara aur vidhesh jyotishi vansh)

 घाघ भड्डरी डाक भड्डरी लोक ज्योतिष परम्परा और विशेष ज्योतिषी वंश - - - - - - - - - - - - - मध्य काल महाकवि घाघ भड्डरी पर्जन्य शास्त्र के महान ज्योतिषी कहावतकार हुए जिन्होने ज्योतिष की भद्र ऋषि परम्परा जो कि मूलतः भृगु ऋषि की भृगु संहिता की ज्योतिष का विस्तार था उसे जन भाषा में लोकप्रिय बनाने और कृषि विज्ञान के सिद्धांत संस्कृत भाषा की जगह लोक भाषा में रूपांतरित कर उसमें अपने अनुभव को जोड़कर अभूतपूर्व कार्य किया । ज्योतिष की भड्डरी परम्परा  यद्यपि बहुत प्राचीन थी जिसे भद्र ऋृषि वंश की वंश परम्परा और शिष्य परम्परा के ज्योतिषी ब्राहमण सदियों से पारम्परिक और पैतृक ज्ञान के रूप में संरक्षित करते रहे थे जो भद्र ज्योतिषी ब्राहमण भद्र जोशी गणक नक्षत्र जीवी मौहूर्तिक ब्राहमण ग्रहविप्र समुदाय के रूप में प्रतिष्ठित थे । ऐतिहासिक काल के ऐसे भद्र ज्योतिषी जोशी बाहमणों में बराह मिहिर आर्य भट्ट का नाम प्रमुख है ।  भारत में पौराणिक ऋषि भद्र ऋषि की ज्योतिष परम्परा में भारत के हर क्षेत्र में अनेकानेक भद्र ज्योतिषी जोशी भड्डरी भविष्य कथन करने वाले पंडित हुए किन्तु होक ज्योतिष की इस महान परम...