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Showing posts from October, 2022

लपती भाषा : जोशी भड्डरी डकोत समुदाय की विशेष भाषा Lapti an old language used by dakot community and joshi bhaddari

लपती भाषा : विलुप्ति के कगार पर - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - लपती भाषा भारत के भृगुवंशी जोशी भड्डरी डाकोत देशांतरी समुदाय की एक अति प्राचीन आषा है जो अब विलुप्ति के कगार पर है । लगातार आधुनिक शिक्षा हिन्दी और अंग्रेजी के बढ़ते प्रचलन और निरन्तर पारम्परिक कार्य व्यापार और  व्यवसाय से पलायन के कारण अब इस समुदाय के लोग अपनी इस प्राचीन भाषा को बोलना छोडते जा रहे है । नए शिक्षित परिवारों में कर्मकाण्ड का माध्यम अब संस्कृत ही होता है और बोलचाल की भाषा हिन्दी अंग्रेजी होती है । केवल कुछ परिवार जो आज भी पारम्परिक पैतृक ग्रह विप्र का जजमानी कर्म करते हैं अथवा तीर्थ स्थानों में देव दर्शन कराने अथवा नदी स्नान का दान दक्षिणा लेने मंदिरों में चंदन टीका लगाने गंगा जल प्रसाद वितरण का काम करते हैं उन्हीं जोशी भड्डरी डाकोत परिवारों में यह लपती भाषा बोली जाती है । आम तौर पर इस समुदाय के लोग जो किसी दूसरे पेशे में हैं और भविष्य बताने ग्रहों की शांति कराने और ग्रहादि का दान लेने का कार्य नहीं करते वे लोग लपती भाषा के कुछ शब्द मात्र जानते है । विशेष रूप से वे लपती भाषा में अपने समाज का...

Bhadra rishi aur bhadra joshi brahman ( भद्र ऋषि और भद्र जोशी ब्राहमण )

  भद्र ऋषि  भद्र ऋृषि भारत  में अनेक महान ऋषि हुए । इन्हीं में एक हैं भद्र ऋृषि । भद्र ऋषि के पिता का नाम सुमेरु ऋषि और माता का नाम मेनका था । जिस पर्वत पर सुमेरू ऋृषि तपस्या करते थे और पुत्र प्राप्ति की कामना करते थे उस पर्वत का नाम उनके नाम पर सुमेरू पर्वत पड़ा । उनकी माता के नाम पर एक पर्वत का नाम मैनाक्य पड़ा । उसी पर्वत की एक शिखर का नाम भद्र पर्वत पड़ा जिसपर भद्र ऋषि ने भगवान विष्णु की तपस्या की । भगवान विष्णु ने उनकी तपस्या से प्रशन्न होकर मानव अवतार में राम के रूप में उन्हें साक्षात दर्शन का वरदान दिया । वनवास के समय राम सीता और लक्ष्मण ने उन्हें यही दण्डक वन में दर्शन दिया । निरन्तर तपस्या से प्रशन्न होकर बाद में स्वर्ग लोक से भगवान राम ने पुनः भद्र ऋषि सीता राम चंद्र के रूप में दर्शन दिया तथा वहीं मूर्ति रूप में विराजमान होना स्वीकार किया । यह स्थान आज भद्राचलम् कहलाता है । यही प्रसिद्ध सीता रामचंद्र मंदिर है । इसे पक्षिण की अयोध्या कहते है । भद्र ऋृषि ने दक्षिण में आर्य धर्म और संस्कृति का प्रचार प्रसार किया । पौराणिक आख्यानों के अनुसार उन्होंने भारत के अनेक...

Rishi sunak

 ऋषि सुनक भारत ऋषि परम्परा का देश है यहाँ अनेक महान ऋषि मुनि हुए है । प्राचीन भारत के सप्त ऋषि प्रसिद्ध हैं । इसी ऋषि परम्परा में अनेक गोत्रकार ऋषि हुए जिनके नाम पर भारत के अनेक वंश के गोत्र चलते हैं । प्राचीन भारत में एक प्रसिद्ध ऋषि शौनक थे जिनके आश्रम में देश भर के ऋषि मुनि विधार्थी एकत्र होकर शिक्षा लेते थे । शौनक ऋषि के पिता सुनक ऋषि के नाम से प्रसिद्ध हुए । भारत में प्रायः अनेक वंश अपने पूर्वज ऋषि अथवा अपने पूर्वज गुरु ऋषि का गोत्र धारण करते है और कुछ वंश ऋषि के नाम को उपनाम की तरह प्रयोग करते है जैसे भरद्वाज, गर्ग , शांडिल्य, वत्स आदि । सुनक भी ऐसे ही उपनाम की तरह कहीं - कहीं प्रयोग में लाया जाता है । नए ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक एक भारतवंशी परिवार से है जिनके पूर्वज भारतीय मूल के थे । सुनक इस परिवार का उपनाम है । मूलतः यह भारतीय आर्य खत्री वंश से है । ऋषि मूल नाम है और सुनक उपनाम । यह उपनाम इस वंश ने कब स्वीकार किया इसकी जानकारी नहीं मिलती । फिर भी नाम और उपनाम दोनों से भारतीयता की मौलिकता का बोध अवश्य होता है । यानी इस परिवार ने अपना धर्म और संस्कार भारतीय ही रखना स्वी...

लाइफस्टाइल

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको बताने जा रहे हैं किस तरह से जीवन में कैसे शुरूआत कर सकते हैं जीवन की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले आपको खुद को समझना होगा जैसे ही आप अपने को समझने लगेंगे जीवन में सबसे परफेक्ट इंसान बन जायेंगे।