भद्र ऋषि भद्र ऋृषि भारत में अनेक महान ऋषि हुए । इन्हीं में एक हैं भद्र ऋृषि । भद्र ऋषि के पिता का नाम सुमेरु ऋषि और माता का नाम मेनका था । जिस पर्वत पर सुमेरू ऋृषि तपस्या करते थे और पुत्र प्राप्ति की कामना करते थे उस पर्वत का नाम उनके नाम पर सुमेरू पर्वत पड़ा । उनकी माता के नाम पर एक पर्वत का नाम मैनाक्य पड़ा । उसी पर्वत की एक शिखर का नाम भद्र पर्वत पड़ा जिसपर भद्र ऋषि ने भगवान विष्णु की तपस्या की । भगवान विष्णु ने उनकी तपस्या से प्रशन्न होकर मानव अवतार में राम के रूप में उन्हें साक्षात दर्शन का वरदान दिया । वनवास के समय राम सीता और लक्ष्मण ने उन्हें यही दण्डक वन में दर्शन दिया । निरन्तर तपस्या से प्रशन्न होकर बाद में स्वर्ग लोक से भगवान राम ने पुनः भद्र ऋषि सीता राम चंद्र के रूप में दर्शन दिया तथा वहीं मूर्ति रूप में विराजमान होना स्वीकार किया । यह स्थान आज भद्राचलम् कहलाता है । यही प्रसिद्ध सीता रामचंद्र मंदिर है । इसे पक्षिण की अयोध्या कहते है । भद्र ऋृषि ने दक्षिण में आर्य धर्म और संस्कृति का प्रचार प्रसार किया । पौराणिक आख्यानों के अनुसार उन्होंने भारत के अनेक...

Comments
Post a Comment