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भृगुवंश , डंक ऋषि और डाकोत ब्राहमण समुदाय Bhriguvanshi dunk Rishi dakot history in Hindi

  भृगुवंश , डंक ऋषि और डाकोत ब्राहमण समुदाय Bhriguvanshi Dunk Rishi Dakot history in Hindi - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - भारत में भृगुवंश (Bhrigunshi) का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है । भगवान परसुराम इसी वंश में हुए । अनुर पुरोहित शुक्राचार्य और उनके वंश की शाखा में प्रसिद्ध डामर तंत्र और नक्षत्र शास्त्र ज्योतिष के प्रणेता डंक ऋषि इसी वंश में हुए । डंक ऋषि को डामराचार्य भी कहा जाता है । इन्हीं डंक ऋषि के वंशज और शिष्य जो कुल छत्तीस गोत्र के थे सब डाकोत ब्राहमण कहलाते है । यह भारत का अति प्राचीन ज्योतिष कर्मी तांत्रिक बाहमण समुदाय है । डंक ऋषि की ज्योतिष और तंत्र परम्परा से अथवा वैवाहिक परम्परा से जो दूसरे गोत्रों के बाहमण जुड़े वे भी डाकोत ब्राहमण कहलाए । इनमें सूर्योपासक शाकलद्वीपी देशांतरी बाहमणों का एक वर्ग ग्रहविप्र और भद्र ऋृषि वंशज ब्राहमणों का एक वर्ग भद्र ब्राहमण या भड्डरी बाहमण जिसे पुरबिया डाकोत कहते हैं प्रमुख है । इन वर्गों में छत्तीस के अलावा गोत्र पाए जाते हैं । पौराणिक ग्रंथों से पता चलता है कि महर्षि भृगु के सात पुत्र थे - च्यवन , वज्रशीर्ष , ...
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घाघ भड्डरी लोक ज्योतिष परम्परा और विशेष ज्योतिषी वंश (Gagh Bhaddari lok jyotish parampara aur vidhesh jyotishi vansh)

 घाघ भड्डरी डाक भड्डरी लोक ज्योतिष परम्परा और विशेष ज्योतिषी वंश - - - - - - - - - - - - - मध्य काल महाकवि घाघ भड्डरी पर्जन्य शास्त्र के महान ज्योतिषी कहावतकार हुए जिन्होने ज्योतिष की भद्र ऋषि परम्परा जो कि मूलतः भृगु ऋषि की भृगु संहिता की ज्योतिष का विस्तार था उसे जन भाषा में लोकप्रिय बनाने और कृषि विज्ञान के सिद्धांत संस्कृत भाषा की जगह लोक भाषा में रूपांतरित कर उसमें अपने अनुभव को जोड़कर अभूतपूर्व कार्य किया । ज्योतिष की भड्डरी परम्परा  यद्यपि बहुत प्राचीन थी जिसे भद्र ऋृषि वंश की वंश परम्परा और शिष्य परम्परा के ज्योतिषी ब्राहमण सदियों से पारम्परिक और पैतृक ज्ञान के रूप में संरक्षित करते रहे थे जो भद्र ज्योतिषी ब्राहमण भद्र जोशी गणक नक्षत्र जीवी मौहूर्तिक ब्राहमण ग्रहविप्र समुदाय के रूप में प्रतिष्ठित थे । ऐतिहासिक काल के ऐसे भद्र ज्योतिषी जोशी बाहमणों में बराह मिहिर आर्य भट्ट का नाम प्रमुख है ।  भारत में पौराणिक ऋषि भद्र ऋषि की ज्योतिष परम्परा में भारत के हर क्षेत्र में अनेकानेक भद्र ज्योतिषी जोशी भड्डरी भविष्य कथन करने वाले पंडित हुए किन्तु होक ज्योतिष की इस महान परम...

लपती भाषा : जोशी भड्डरी डकोत समुदाय की विशेष भाषा Lapti an old language used by dakot community and joshi bhaddari

लपती भाषा : विलुप्ति के कगार पर - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - लपती भाषा भारत के भृगुवंशी जोशी भड्डरी डाकोत देशांतरी समुदाय की एक अति प्राचीन आषा है जो अब विलुप्ति के कगार पर है । लगातार आधुनिक शिक्षा हिन्दी और अंग्रेजी के बढ़ते प्रचलन और निरन्तर पारम्परिक कार्य व्यापार और  व्यवसाय से पलायन के कारण अब इस समुदाय के लोग अपनी इस प्राचीन भाषा को बोलना छोडते जा रहे है । नए शिक्षित परिवारों में कर्मकाण्ड का माध्यम अब संस्कृत ही होता है और बोलचाल की भाषा हिन्दी अंग्रेजी होती है । केवल कुछ परिवार जो आज भी पारम्परिक पैतृक ग्रह विप्र का जजमानी कर्म करते हैं अथवा तीर्थ स्थानों में देव दर्शन कराने अथवा नदी स्नान का दान दक्षिणा लेने मंदिरों में चंदन टीका लगाने गंगा जल प्रसाद वितरण का काम करते हैं उन्हीं जोशी भड्डरी डाकोत परिवारों में यह लपती भाषा बोली जाती है । आम तौर पर इस समुदाय के लोग जो किसी दूसरे पेशे में हैं और भविष्य बताने ग्रहों की शांति कराने और ग्रहादि का दान लेने का कार्य नहीं करते वे लोग लपती भाषा के कुछ शब्द मात्र जानते है । विशेष रूप से वे लपती भाषा में अपने समाज का...

Bhadra rishi aur bhadra joshi brahman ( भद्र ऋषि और भद्र जोशी ब्राहमण )

  भद्र ऋषि  भद्र ऋृषि भारत  में अनेक महान ऋषि हुए । इन्हीं में एक हैं भद्र ऋृषि । भद्र ऋषि के पिता का नाम सुमेरु ऋषि और माता का नाम मेनका था । जिस पर्वत पर सुमेरू ऋृषि तपस्या करते थे और पुत्र प्राप्ति की कामना करते थे उस पर्वत का नाम उनके नाम पर सुमेरू पर्वत पड़ा । उनकी माता के नाम पर एक पर्वत का नाम मैनाक्य पड़ा । उसी पर्वत की एक शिखर का नाम भद्र पर्वत पड़ा जिसपर भद्र ऋषि ने भगवान विष्णु की तपस्या की । भगवान विष्णु ने उनकी तपस्या से प्रशन्न होकर मानव अवतार में राम के रूप में उन्हें साक्षात दर्शन का वरदान दिया । वनवास के समय राम सीता और लक्ष्मण ने उन्हें यही दण्डक वन में दर्शन दिया । निरन्तर तपस्या से प्रशन्न होकर बाद में स्वर्ग लोक से भगवान राम ने पुनः भद्र ऋषि सीता राम चंद्र के रूप में दर्शन दिया तथा वहीं मूर्ति रूप में विराजमान होना स्वीकार किया । यह स्थान आज भद्राचलम् कहलाता है । यही प्रसिद्ध सीता रामचंद्र मंदिर है । इसे पक्षिण की अयोध्या कहते है । भद्र ऋृषि ने दक्षिण में आर्य धर्म और संस्कृति का प्रचार प्रसार किया । पौराणिक आख्यानों के अनुसार उन्होंने भारत के अनेक...

Rishi sunak

 ऋषि सुनक भारत ऋषि परम्परा का देश है यहाँ अनेक महान ऋषि मुनि हुए है । प्राचीन भारत के सप्त ऋषि प्रसिद्ध हैं । इसी ऋषि परम्परा में अनेक गोत्रकार ऋषि हुए जिनके नाम पर भारत के अनेक वंश के गोत्र चलते हैं । प्राचीन भारत में एक प्रसिद्ध ऋषि शौनक थे जिनके आश्रम में देश भर के ऋषि मुनि विधार्थी एकत्र होकर शिक्षा लेते थे । शौनक ऋषि के पिता सुनक ऋषि के नाम से प्रसिद्ध हुए । भारत में प्रायः अनेक वंश अपने पूर्वज ऋषि अथवा अपने पूर्वज गुरु ऋषि का गोत्र धारण करते है और कुछ वंश ऋषि के नाम को उपनाम की तरह प्रयोग करते है जैसे भरद्वाज, गर्ग , शांडिल्य, वत्स आदि । सुनक भी ऐसे ही उपनाम की तरह कहीं - कहीं प्रयोग में लाया जाता है । नए ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक एक भारतवंशी परिवार से है जिनके पूर्वज भारतीय मूल के थे । सुनक इस परिवार का उपनाम है । मूलतः यह भारतीय आर्य खत्री वंश से है । ऋषि मूल नाम है और सुनक उपनाम । यह उपनाम इस वंश ने कब स्वीकार किया इसकी जानकारी नहीं मिलती । फिर भी नाम और उपनाम दोनों से भारतीयता की मौलिकता का बोध अवश्य होता है । यानी इस परिवार ने अपना धर्म और संस्कार भारतीय ही रखना स्वी...

लाइफस्टाइल

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको बताने जा रहे हैं किस तरह से जीवन में कैसे शुरूआत कर सकते हैं जीवन की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले आपको खुद को समझना होगा जैसे ही आप अपने को समझने लगेंगे जीवन में सबसे परफेक्ट इंसान बन जायेंगे।